बेवफ़ा बावफ़ा बन गया है, राहज़न रहनुमा बन गया है।
कल डुबोया था जिस ने सफ़ीना, आज वो नाख़ुदा बन गया है।।
(साहिर हाशमी कानपुरी के कविता संकलन “नकी़बे खुदी” से)
Contributed by Anwer Hashmi, Dubai
बेवफ़ा बावफ़ा बन गया है, राहज़न रहनुमा बन गया है।
कल डुबोया था जिस ने सफ़ीना, आज वो नाख़ुदा बन गया है।।
(साहिर हाशमी कानपुरी के कविता संकलन “नकी़बे खुदी” से)
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