तक़दीर बनाना सीखो
हर कीमत पे आन बचाना सीखो
वक्त आए तो जान गंवाना सीखो
नादानों , तकदीर पे शाकिर क्यों हो
ख़ुद अपनी तक़दीर बनाना सीखो
बदनाम
मुझ को ही बदनाम किए जाते हो
दुनिया के इल्जाम दिए जाते हो
तुम भी अपनी समत कभी देखो तो
क्यों मेरा ही नाम लिए जाते हो
दौलत का नशा
तहज़ीब की बुनियाद हिला देता है
अखलाक को पैगामे फ़ना देता है
बढ़ जाए अगर नश्शाये दौलत साहिर
इंसान को हैवान बना देता है
वीरान चौराहे
राही सब हैरान नज़र आते हैं
चेहरे भी बेजान नज़र आते हैं
अफवाहों का दौर, इलाही तौबा
चौराहे वीरान नज़र आते हैं
संविधान
तड़पे हैं मजबूर उठा कर लाओ
ज़ख्मों से हैं चूर उठा कर लाओ
मासूमों का कत्ल कहाँ लिखा है
भारत का दस्तूर उठा कर लाओ
ज़ख्मों पर नमक
आ पहुंचे प्रधान, सुनो मज़लूमों
लादेंगे एहसान, सुनो मज़लूमों
ज़ख्मों पर वो आज नमक क्षिड़केंगे
होता है ऐलान, सुनो मज़लूमों